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काँग्रेस लेबलसह पोस्ट दाखवत आहे

मुस्लिम तरुणांनी मंदिराभवती मानवी साखळी निर्माण करत मंदिराच रक्षण केलं!

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बंगळूरमध्ये काँग्रेस आमदाराच्या पुतण्याने पैगंबरांवर आपत्तीजनक पोस्ट केल्यामुळे निषेध करण्यास जमलेल्या जमावावर पोलिसांनी गोळीबार केला त्यात पाच जणांचा मृत्यू झाला त्यामुळे  हिंसात्मक वातावरण तयार झाले. एक  जमाव काँग्रेस आमदाराच्या घरासमोर जमा झाला होता.आमदाराच्या घराजवळ एक मंदिर होत. एका आमदाराच्या पुतण्याच्या चुकीमुळे दोन समाजात तेढ निर्माण होऊ नये म्हणून काही मुस्लिम युवकांनी त्या भागातील मंदिराभवती मानवी साखळी निर्माण करत मंदिराचं रक्षण केल. या हिंसेवेळी झालेल्या हल्ल्यात 60 पोलीस देखील जखमी झालेत.  मुस्लिम युवकांच्या कृतीमुळे तेथील वातावरण काही प्रमाणात निवळण्यास मदत झाली. तेथील युवकांनी जमलेल्या युवकांची समजूत घालून माघारी लावले  हे वाचा :-  मराठा दांपत्याने घडवले मुस्लिम मुलीला

संघवादी ठीक से पढे तो मोदी को भीष्मपितामह मानना छोड के नेहरू को मानेगी ?

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आइये आज आर्टिकल 341 को आर्टिकल 15 की नज़र से देखते है, साथ मे समझते है, कांग्रेस; मुसलमान, इसाई और पारसियों की कितनी बड़ी संरक्षक है। भारतीय संविधान के अनुछेद 341 में राष्ट्रपति महोदय को ये अधिकार दिया गया कि, वो विभिन्न जातियों और कबीलों के नाम एक सूची में शामिल कर सकते है, जिसे आरक्षण का फ़ायदा मिल सकेगा। जब ये अनुछेद अस्तित्व में आया तब इसमे सभी धर्मों की पिछली जातियाँ शामिल थी, जिन्हें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कहा गया। फिर 1950 में राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने एक अनुसूची जारी की, जिसके पैरा (3) में लिखा गया की किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जिसका सम्बन्ध हिन्दू धर्म से नहीं है, उसे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का स्थान प्राप्त नहीं हो सकेगा। मतलब ये की आरक्षण सिर्फ़ और सिर्फ़ हिंदुओं के लिए रिजर्व रहेगा। बात यही ख़त्म नहीं हुई, फिर 1956 में इस अध्यादेश को अमेंड करके सिक्खों और 1990 में बौद्धों को पैरा (3) में सम्मिलित कर दिया गया। मतलब, अब कोई भी भरतीय नागरिक जिसका सम्बन्ध हिन्दू, सिक्ख या बौद्ध धर्म से नहीं होगा वो अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल नहीं होगा। इस तरह ई...