संघवादी ठीक से पढे तो मोदी को भीष्मपितामह मानना छोड के नेहरू को मानेगी ?
आइये आज आर्टिकल 341 को आर्टिकल 15 की नज़र से देखते है, साथ मे समझते है, कांग्रेस; मुसलमान, इसाई और पारसियों की कितनी बड़ी संरक्षक है।
भारतीय संविधान के अनुछेद 341 में राष्ट्रपति महोदय को ये अधिकार दिया गया कि, वो विभिन्न जातियों और कबीलों के नाम एक सूची में शामिल कर सकते है, जिसे आरक्षण का फ़ायदा मिल सकेगा। जब ये अनुछेद अस्तित्व में आया तब इसमे सभी धर्मों की पिछली जातियाँ शामिल थी, जिन्हें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कहा गया।
फिर 1950 में राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने एक अनुसूची जारी की, जिसके पैरा (3) में लिखा गया की किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जिसका सम्बन्ध हिन्दू धर्म से नहीं है, उसे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का स्थान प्राप्त नहीं हो सकेगा। मतलब ये की आरक्षण सिर्फ़ और सिर्फ़ हिंदुओं के लिए रिजर्व रहेगा।
बात यही ख़त्म नहीं हुई, फिर 1956 में इस अध्यादेश को अमेंड करके सिक्खों और 1990 में बौद्धों को पैरा (3) में सम्मिलित कर दिया गया। मतलब, अब कोई भी भरतीय नागरिक जिसका सम्बन्ध हिन्दू, सिक्ख या बौद्ध धर्म से नहीं होगा वो अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल नहीं होगा। इस तरह ईसाई, मुसलमान, जैन और पारसी सहित बाक़ी सभी धर्म को पैरा 3 से बाहर रखा गया।
बात अब भी यही ख़त्म नहीं होती है, इसमे लिखा गया, कोई भी हिन्दू (हिन्दू, सिख, बौद्ध) तब तक ही आरक्षण का फायदा ले सकता है, जब तक वो हिन्दू बना रहे, अगर वो अपना धर्म परिवर्तन करता है, तब उसे आरक्षण का फायदा नहीं मिलेगा। साथ मे मुसलमान, ईसाई, पारसियों के लिए लिखा गया, अगर वो अपना धर्म परिवर्तन कर हिन्दू बनाते है, तब उन्हें इस आरक्षण का फायदा दिया जाएगा।
अब आर्टिकल 15 को समझते हैं। आर्टिकल 15 के नियम 1 के तहत राज्य किसी भी नागरिक के साथ जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान और वंश के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता। अब आप बताइए, नेहरू ने भारत के ही मुसलमान, ईसाई, पारसियों समेत उन सभी धर्मों से क्या छीना जो हिन्दू, सिख और बौद्ध धर्म के लोगों को अबतक मिल रहा है?
इसका आकलन करना बहुत आसान है, आज़ादी के वक़्त सरकारी नौकरी में मुसलमानों का प्रतिशत दिखिये और आज कितने प्रतिशत मुसलमान सरकारी नौकरी में है उसे दिखिये, सबकुछ समझ मे आ जायेगा। बल्कि ये भी सोचिये, कैसे लगभग 26% सनातनी 79.8% हिन्दू बन गए। इसे समझने के लिए आपको हिन्दू कोड बिल पढ़ना पड़ेगा, फिर हिन्दू मैरेज एक्ट साथ मे संविधान के इसी 341 अनुच्छेद को फिर से एक बार समझना पड़ेगा। कैसे आदिवासियों, सिखों, बोद्धयों को ज़बरदस्ती हिन्दू बनाया गया 1950-52 से पहले आधिकारिक रूप से हिन्दू जैसा कोई शब्द ही नहीं था।
नेहरू के कांग्रेस ने हमारा जितना बिगाड़ा है, सांघी अगर ठीक से पढ़ लें तब मोदी को भगवान कहने के बजाय नेहरू को भीष्मपितामह का स्थान दे देंगे, पर वो हांथी के बड़े बड़े दांत की तरफ़ ज़्यादा आकर्षित होते हैं।।
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